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أعـنـدك
أن
قـلـبـي
مسـتـهـام |
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وجفنـي
ليـس
يطـرقـه
المـنـام |
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حياتـي
فيـك
أو
مـوتـي
تسـاوى |
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كـذاك
الـعـذل
عنـدي
والـمـلام |
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مكانـك
فـي
الحشـا
رحـب
مكيـن |
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حللـت
فطـاب
فيـه
لـك
المـقـام |
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دليلـي
فـي
الهـوى
خفقـان
قلبـي |
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وأجـفـان
مـدامـعـها
سـجــام |
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بـخـدك
سـوسـن
غــض
وورد |
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ووجـهـك
دونـه
البـدر
التـمـام |
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نعيمـي
في
رضـاك
وأنـت
سولـي |
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فصـل
مضنـى
أضـر
بـه
السقـام |
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عـذابـي
فيـك
يـا
مـولاي
عـذب |
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وفيـك
حـلا
التـهـتـك
والهـيـام |
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بثغـرك
مـن
نفيـس
الـدر
عـقـد |
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ومـرجـان
يجـول
بهـا
الـمـدام |
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دعـانـي
للـهـوى
قـد
قـويــم |
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وأجـفـان
بهـا
سـحـر
الأنــام |
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إذا
أنـا
بـالطلـول
أبـث
مـا
بـي |
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وانـدبهـا
يطـارحنــي
الحمــام |
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لمـن
أشكـو
بمـا
ألقـى
وعينــي |
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علـيَّ
جنـت
فـلـذَّ
لـي
الغــرام |
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سقـى
صـوب
الحيـا
حيـا
وربعـا |
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أحـبـتـنـا
بمـغـنـاه
أقـامـوا |
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لأنـي
قـد
قطـعـت
بـه
زمـانـا |
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وشملـي
بـالحبيـب
لـه
انتـظـام |
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متى
شئـت
اسـم
من
يهـواه
قلبـي |
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فـذاك
اسـم
بـه
يـبـدا
الـكـلام |