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إن
التـي
زعمت
فـؤادك
ملّهـا |
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خلقت
هواك
كما
خلقت
هوى
لها |
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فإذا
وجـدت
لها
وساوس
سلـوة |
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شفع
الضميـر
إلى
الفؤاد
فسلهـا |
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بيضاء
باكرها
النعيـم
فصاغهـا |
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بلبـاقة
فـأدقهـا
وأجـلهــا |
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إنـي
لأكتم
في
الحشا
من
حبهـا |
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وجـدا
لو
أصبح
فوقها
للأظلهـا |
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ويبيت
تـحت
جوانحي
حب
لهـا |
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لو
كـان
تحت
فراشهـا
لأقلهـا |
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ضنـت
بنائلها
فقلت
لصاحبـي |
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ما
كان
أكثرهـا
لنـا
وأقلهـا |